विज्ञान की प्रयोगशाला से निकलकर जब बच्चों की कल्पना ने खुले आसमान का रुख किया तो नजारा रोमांच से भर गया। ब्राइट स्टार्ट इंटरनेशनल एकेडमी, जसपुर में बुधवार को एस्ट्रो पाठशाला के सहयोग से आयोजित ‘आकाशयान स्पर्धा’ में विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने अपने रॉकेट स्वयं तैयार किए और इसके लिए घरों में आसानी से उपलब्ध कोका कोला, पेप्सी आदि की खाली प्लास्टिक बोतलों का उपयोग किया।
यह प्रतियोगिता केवल रॉकेट लॉन्च करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों के लिए डिजाइनिंग, नवाचार, प्रयोग और समस्या-समाधान का जीवंत मंच बनी। बच्चों ने खाली प्लास्टिक बोतलों को प्रेशर वैसेल के रूप में तैयार करते हुए अपनी सोच के अनुसार रॉकेट का निर्माण किया। उन्होंने रॉकेट की संरचना में स्वयं आवश्यक बदलाव और नवाचार किए तथा उन्हें प्रक्षेपण के लिए तैयार किया। इस पूरी प्रक्रिया ने विद्यार्थियों को यह अनुभव कराया कि वैज्ञानिक प्रयोग केवल महंगे उपकरणों पर निर्भर नहीं होते, बल्कि सामान्य वस्तुओं से भी नए विचारों को वास्तविक रूप दिया जा सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मोहित कुमार जोशी रहे। श्री जोशी वर्तमान में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES), नैनीताल में केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) एवं रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। भारत की 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके कारण उन्हें ‘टेलीस्कोप मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें प्रतिष्ठित आर्यभट्ट पुरस्कार (सप्तर्षि पुरस्कार) से सम्मानित किया जा चुका है। वे लोकप्रिय टेलीविजन कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री मोहित कुमार जोशी ने उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, सवाल पूछने और प्रयोगों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिज्ञासा और निरंतर प्रयास ही नए आविष्कारों की नींव रखते हैं।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार हाइड्रो रॉकेटों का प्रक्षेपण दबावयुक्त जल एवं वायु के सिद्धांत पर किया गया। विद्युत कंप्रेसर की सहायता से रॉकेट में दबाव बनाया गया और लॉन्च पैड से उन्हें प्रक्षेपित किया गया। लगभग 100 PSI तक दबाव में किए गए प्रक्षेपणों ने दर्शकों के रूप में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों में खासा उत्साह पैदा किया।
प्रतियोगिता के हाइड्रो रॉकेट्री के जूनियर एवं सीनियर वर्ग में रॉकेटों को 45 डिग्री के कोण पर प्रक्षेपित किया गया। इसमें रॉकेट द्वारा तय की गई अधिकतम क्षैतिज दूरी को प्रमुख आधार बनाया गया। वहीं पैराशूट रॉकेट्री वर्ग में रॉकेटों को 90 डिग्री के कोण पर सीधे ऊपर की ओर प्रक्षेपित किया गया। इस वर्ग में रॉकेट की वायुगतिकीय स्थिरता तथा ऊँचाई पर पहुँचने के बाद पैराशूट के सफलतापूर्वक खुलने की प्रक्रिया का मूल्यांकन किया गया।
रोमांचक प्रक्षेपणों के बाद विभिन्न वर्गों के परिणाम घोषित किए गए। पैराशूट रॉकेट्री वर्ग में कक्षा 7 के निशांत अग्रवाल ने प्रथम, कक्षा 7 के ही युवराज पाठक ने द्वितीय तथा कक्षा 8 के मोद्रिक गोरियान और सहजप्रीत सिंह की जोड़ी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
हाइड्रो रॉकेट्री के सीनियर वर्ग में कक्षा 8 की तनिशा एवं कक्षा 7 के कनिष्क की जोड़ी प्रथम रही। कक्षा 8 के तेजस एवं कक्षा 7 के गुरवीर की जोड़ी ने द्वितीय तथा कक्षा 8 के गुरएकम एवं कक्षा 7 के शबद की जोड़ी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं जूनियर वर्ग में कक्षा 5 की मानवी और कक्षा 6 के एकमवीर ने प्रथम स्थान, कक्षा 5 की इशानी एवं कक्षा 6 की पूर्वी ने दूसरा स्थान तथा कक्षा 5 की दीपज्योत एवं कक्षा 6 की निमरत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मधु शर्मा ने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें अपने ज्ञान को प्रयोग में लाने और नए समाधान खोजने के अवसर देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘आकाशयान स्पर्धा’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके प्रयासों के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के प्रबंधक श्री अमित कांबोज के मार्गदर्शन में विद्यालय में विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक, खेल, रचनात्मकता और नवाचार के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन का प्रयास है कि विद्यार्थियों को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से सीखने के अवसर मिलें। इसी सोच का परिणाम है कि ‘आकाशयान स्पर्धा’ जैसे अभिनव आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वयं कुछ बनाने, उसमें सुधार करने और अपने प्रयोग को वास्तविक रूप में देखने का अवसर मिला।
विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए एस्ट्रो पाठशाला की टीम के सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया। आयोजन ने विद्यार्थियों में विज्ञान और एयरोस्पेस के प्रति उत्सुकता को नई दिशा दी।
‘आकाशयान स्पर्धा’ ने यह संदेश दिया कि एक साधारण खाली बोतल भी जब बच्चों की कल्पना, जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच से जुड़ती है, तो वह उनके सपनों को आसमान तक पहुँचाने का माध्यम बन सकती है।

संपादक – जसपुर टाइम्स
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