March 7, 2026

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जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसमस्याओं के समाधान का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा

देहरादून।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और जनोन्मुखी नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसमस्याओं के समाधान का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। आज,15 जनवरी 2026 तक की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस बात की सशक्त पुष्टि करती है कि सरकार सीधे जनता तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है।

उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सभी जनपदों में अब तक 347 शिविरों के माध्यम से जनता को सीधे प्रशासनिक सेवाओं से जोड़ा गया है। इन शिविरों में 2,77,654 नागरिकों की सहभागिता रही।

जनसमस्याओं के समाधान की दृष्टि से भी यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है। इन शिविरों में कुल 22,293 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 18,973 शिकायतों का सफल निस्तारण सुनिश्चित किया गया है। यह उपलब्धि सरकार की त्वरित कार्यप्रणाली और जवाबदेही को रेखांकित करती है।

कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा नागरिकों को प्रमाण पत्र एवं लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया भी निरंतर गति से आगे बढ़ी है। अब तक कुल 38,255 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त हुआ है, जो सेवा वितरण की प्रभावशीलता का स्पष्ट प्रमाण है।

इसके अतिरिक्त, अन्य कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1,38,011 नागरिक पूर्व दिवस तक विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हो चुके थे, जबकि आज 13,554 नए लाभार्थी जोड़े गए। इस प्रकार कुल 1,51,565 नागरिकों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा चुका है, जो सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित हो।

यह समग्र उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार की उस कार्यसंस्कृति को दर्शाती है, जिसमें जनसंवाद, त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और परिणाम आधारित शासन को सर्वोपरि रखा गया है। प्रदेश भर में मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया यह सिद्ध करती है कि यह मॉडल आगामी समय में सुशासन की एक मिसाल बनेगा।