उत्तराखंड विधानसभा, जिसे लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, वहां से हाल ही में आई यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। नीतियों और विकास पर चर्चा के बजाय, जब ‘माननीय’ व्यक्तिगत छींटाकशी पर उतर आते हैं, तो यह न केवल संसदीय मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि जनता की उम्मीदों पर भी चोट है।
उत्तराखंड विधानसभा के सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होना आम बात है, लेकिन हाल ही में भाषा का स्तर जिस तरह गिरा, उसने सबको हैरान कर दिया। मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुई जुबानी जंग अब गलियारों में चर्चा का विषय है।
क्या था पूरा मामला?
बहस की शुरुआत तब हुई जब काजी निजामुद्दीन ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए मंत्रियों की ‘आवाज’ को सवाल उठाए। काजी निजामुद्दीन (MLA, मंगलौर) और कहने लगे कि “जनता तो कुपोषित है ही, क्या मंत्री भी कुपोषित हो गए हैं? आप तो ज़ोर से बोलो!”
हालांकि, इसके जवाब में जो सुनने को मिला, उसने सदन की गरिमा को और नीचे गिरा दिया। सुबोध उनियाल (कैबिनेट मंत्री) ने जबाब देते हुए कहा कि “कुपोषित तो तेरी शक्ल दिख रही है मुझे। कुछ तेरी पार्टी कुपोषित लगती है, और कुछ तेरी सेहत कुपोषित लग रही है।”

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