जसपुर।गांव हल्दुआ साहू में रावण का दहन एक दिन बाद हुआ। इसकी वजह यह है कि गांव के लोग दशहरा पर दुकानदारों के व्यस्त होने पर रावण दहन नहीं करते हैं। वह हर साल अगले दिन ही रावण को जलाते हैं। रविवार को गांव हल्दुआ में ग्रामीणों ने आपसी सौहार्द्र के बीच पर्व मनाकर देर शाम लंकापति को जलाया। इस बीच जय श्री राम के जयकारों से गांव गूंज उठा। लोग लंकेश की अस्थियों घरों को ले गए। बता दें कि गांव हल्दुआ में रामलीला को पंजाबी समाज के लोग मिल जुलकर कराते हैं तथा खुद ही मंचन करते हैं। बताते हैं कि दशहरा पर्व पर रावण दहन इसलिए नहीं करते हैं कि मेले में आने वाले दुकानदार व्यस्त रहते हैं। इसके बाद दुकानदार खाली हो कर गांव पहुंच जाते हैं। रविवार को राम, रावण की झांकी निकालकर गांव के प्राथमिक विधालय के मैदान में मेला लगाया गया। मेले में महिला पुरुषों ने खरीदारी की। शाम को राम और लक्ष्मण का रूप धरे युवकों ने अपने बाणों से लंकेश का पुतला जला दिया। रामलीला मंच संचालक संतलाल रहेजा, राजकुमार बाटला, विजय रहेजा, रवि छाबड़ा ने बताया की रामलीला पिछले 60 वर्षों से निरंतर अपना सफल मंचन करती आ रही है। इस दौरान रामलीला और अखाड़ा कमेटी के उस्ताद और अतिथियों को सम्मानित किया। रवि छाबड़ा, राहुल पैगिया सुखवीर सिंह, दिवाकर सयाल, विपिन नारंग, सुनील नारंग, रोहित अरोड़ा, कुंदन लाल, काशीराम खुराना, गोप रहेजा, मंगतराम मोगा, राजकुमार रहेजा, दीपक रहेजा, विजय रहेजा, राकेश खुराना, विजय शर्मा, संदीप नारंग रहे।

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